पुरा देश ऐपल के बुखार में डूब चुका है शाम होते ही रोजाना के दिन चर्या हो खत्म कर हाथ में रिमोट लिए टीवी के सामने बैठकर दुनिया संसार भूला चुका भारतीय दर्शक दूसरे खेलों के बारे में क्यों सोचे भला पब्लिक को तो ये याद ही नही कि अगस्त में खेलों का महाकुम्भ शुरू होने वाला है खासकर दिल्ली की पब्लिक जिसे पिछले दिने ओलीपिक मशाल कि वजह से इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था घंटों ट्रैफिक के चलते तमाम परेशानियों पेश आई थी आईपील ने मनो मरहम लगा हो दिया लेकिन भाई उन खिलाड़ियों का क्या जो खेल प्रेमियों के अभाव में ही सही देश का नाम रोशन करने की तैयारियों में मशगूल हैं
हो सकता है की आईपील का पारा उतारते ही उनके ये चिंता सताए कि कितने पदक आ रहें भारत की झोली में जी हाँ ये इंडिया की पब्लिक है बीडू इसे तुरंत रिजल्ट चाहिए आख़िर २०-२० का ज़माना है पदक आए ना आए खिअदियों को कोसने को तो हम तैयार बैठे हैं
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