Friday, July 4, 2008

खिलाड़ी बना खिलौना पार्ट 2


क्या आपने कभी खिलाड़ियों को इतना पस्त देखा है ? क्या आपने खिलाड़ियों को मैदान में लड़खादते देखा है ? अगर हाँ तो एशिया कप २००८ आपके जेहन में हमेशा के लिए बैठ गया होगा कभी कभी तो ये सोच कर हैरानी होती है की मैदान में लडखडाते इन खिलाड़ियों की कोई सुध लेनेवाला है भी या केवल रिंग में इन्हें उतारकर हंटर चलने वाले ही जयादा हैं बात सिर्फ़ एक प्लेयर या एक काउंट्री की नही चाहे ओ श्रीलंका हो पाकिस्तान हो या फिर इंडिया किसी भी मुल्क के लिए खेलने वाले इन प्लेयर के बारे में कौन सोचेगा ? आप हम या ओ बोर्ड जिसके अंदर ये खेलते हैं
एक टीम के कप्तान ने जब इसकी शिकायत की तो किसी ने नही कुछ कहा मुंह में ऊँगली देकर बुलवाने वाली मीडिया ने बोर्ड के ऐसे अधिकारी को पकड़ा जिसे कभी क्रिकेट खेलने वालों ने नही जाना उसने उसे उस कप्तान को नही खेलने की धमकी तक दे डाली बेशक लड़खादते हुए ही सही वो कप्तान दुसरे दिन अपनी टीम को जीतते हुए देख उस अधिकारी को थोडी भी शर्म महसूस नही हुई होगी क्योंकी शर्म नाम की चीज़ इन बन्दों में है ही नही
तो सवाल ये है की खिलाड़ियों के असोसिएशन ने आवाज़ नही उठाई जिसे बनाया ही इसके लिए गया है वो चुप चाप ये तमाशा क्यों देख रही है वो तमशा जिसमे खिलाड़ी एक खिलोने से जयादा फिलहाल कुछ भी नज़र नही आरहा कहने वाले ये भी कहेंगे की आईपील खेलते समय ये खिलाड़ी क्यों नही थकते तो इसका जवाब है जनाब कभी आप उसी मैदान के कम से कम एक चक्कर लगा कर देखिये ओर जहाँ तक बात पैसों की है तो सवाल ये उठता है की पैसा लीग किसका है ओर इसकी शुरुआत किसने की ओर किस लिए की कम से कम खिलाड़ियों ने तो बिल्कुल ही नही